एक ही कंपनी में 40 साल का सफर: N. Chandrasekaran की प्रेरणादायक कहानी

किसी कंपनी में कुछ साल काम करना आज के समय में सामान्य बात है, लेकिन एक ही कारोबारी समूह के साथ लगभग चार दशक तक जुड़े रहना और उसी सफर में एक सामान्य प्रोफेशनल से देश के सबसे बड़े कॉर्पोरेट समूहों में से एक के शीर्ष नेतृत्व तक पहुंचना अपने आप में बेहद खास है। N. Chandrasekaran की कहानी कुछ ऐसी ही है। उन्होंने 1987 में Tata Consultancy Services यानी TCS से अपना सफर शुरू किया और करीब 30 साल तक TCS में अलग-अलग जिम्मेदारियां निभाईं। बाद में 2017 में वह Tata Sons के चेयरमैन बने।
उनकी यह यात्रा सिर्फ पदों के बदलने की कहानी नहीं है। इसमें लगातार सीखने, बदलती टेक्नोलॉजी को समझने, बड़ी जिम्मेदारियां संभालने और लंबे समय तक एक संस्थान के साथ विश्वास बनाए रखने की कहानी छिपी है। यही वजह है कि N. Chandrasekaran का करियर आज भी कॉर्पोरेट दुनिया में एक अलग उदाहरण माना जाता है।
N. Chandrasekaran ने कैसे शुरू किया अपना करियर?
N. Chandrasekaran का जन्म 2 जून 1963 को हुआ था। उन्होंने Bachelor in Applied Sciences के बाद Regional Engineering College, Trichy से Computer Applications में मास्टर डिग्री हासिल की। पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने 1987 में TCS जॉइन किया। उस समय भारत का आईटी सेक्टर आज की तरह विशाल नहीं था, लेकिन Chandrasekaran ने तकनीक की बदलती दुनिया में अपनी जगह बनानी शुरू कर दी।
TCS में उनकी शुरुआत एक प्रोफेशनल के तौर पर हुई, लेकिन आने वाले वर्षों में उन्होंने कंपनी के अलग-अलग हिस्सों में काम करते हुए अपने अनुभव को लगातार मजबूत किया। यही लंबा अनुभव बाद में उनके नेतृत्व की सबसे बड़ी ताकत बना।
TCS में 30 साल का सफर कैसे बना खास?
N. Chandrasekaran ने TCS में करीब 30 साल बिताए। इस दौरान उन्होंने टेक्नोलॉजी, ऑपरेशंस, ग्लोबल बिजनेस और नेतृत्व से जुड़ी कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालीं। 2002 में उन्होंने ग्लोबल सेल्स की जिम्मेदारी संभाली और इसके बाद कंपनी के अंतरराष्ट्रीय विस्तार में उनकी भूमिका और महत्वपूर्ण होती गई।
उनके नेतृत्व में TCS ने नए अंतरराष्ट्रीय बाजारों और डिजिटल तकनीकों पर अपना ध्यान बढ़ाया। यूरोप, चीन और लैटिन अमेरिका जैसे बाजारों में कंपनी के विस्तार के दौर में भी उनका अनुभव महत्वपूर्ण रहा। धीरे-धीरे उनका नाम TCS के सबसे प्रभावशाली लीडर्स में शामिल होने लगा।
TCS के CEO और MD बनने तक का सफर

N. Chandrasekaran के करियर का एक बड़ा पड़ाव साल 2009 में आया, जब उन्हें Tata Consultancy Services का CEO और Managing Director बनाया गया। इससे पहले वह कंपनी में Chief Operating Officer और Executive Director की भूमिका में थे। उन्होंने 6 अक्टूबर 2009 को CEO और MD के रूप में जिम्मेदारी संभाली।
CEO बनने के बाद उनके सामने एक ऐसी कंपनी को आगे ले जाने की जिम्मेदारी थी जो पहले ही वैश्विक आईटी बाजार में मजबूत स्थिति बना चुकी थी। उनके नेतृत्व में TCS ने अपनी ग्लोबल पहुंच, डिजिटल क्षमताओं और बड़े कारोबारी ग्राहकों के साथ संबंधों को और मजबूत किया।
N. Chandrasekaran की नेतृत्व शैली में क्या खास रहा?
Chandrasekaran की सबसे बड़ी खासियतों में से एक यह रही कि उन्होंने टेक्नोलॉजी को केवल एक सर्विस के तौर पर नहीं देखा, बल्कि उसे बिजनेस के भविष्य से जोड़कर समझा। डिजिटल बदलाव तेजी से बढ़ रहा था और कंपनियों के काम करने का तरीका बदल रहा था। ऐसे समय में TCS ने डिजिटल उत्पादों और प्लेटफॉर्म पर भी अपना फोकस बढ़ाया।
उनकी सोच में बड़े फैसले लेने के साथ-साथ लंबे समय की तैयारी पर भी जोर दिखाई देता है। यही वजह है कि उनकी नेतृत्व यात्रा को सिर्फ आईटी सेक्टर की सफलता के रूप में नहीं देखा जाता, बल्कि इसे एक बड़े कॉर्पोरेट नेतृत्व के उदाहरण के तौर पर भी समझा जाता है।
Tata Sons की कमान तक कैसे पहुंचे N. Chandrasekaran?
साल 2016 के अंत में Chandrasekaran के करियर में एक और बड़ा मोड़ आया। उन्हें Tata Sons के बोर्ड में शामिल किया गया और जनवरी 2017 में उन्हें Tata Sons का चेयरमैन नियुक्त किया गया। उन्होंने 21 फरवरी 2017 को यह जिम्मेदारी संभाली।
यह उनके लिए बेहद बड़ी जिम्मेदारी थी, क्योंकि अब उन्हें केवल एक आईटी कंपनी का नेतृत्व नहीं करना था। Tata Group की अलग-अलग कंपनियां ऑटोमोबाइल, स्टील, पावर, होटल, कंज्यूमर प्रोडक्ट्स, एयरलाइन और टेक्नोलॉजी जैसे कई क्षेत्रों में काम करती हैं। ऐसे विविध कारोबार वाले समूह की दिशा तय करना उनके करियर की एक बिल्कुल नई चुनौती थी।
One Tata Strategy ने कैसे बदली सोच?
Tata Sons के चेयरमैन बनने के बाद Chandrasekaran ने समूह के लिए “One Tata” सोच पर जोर दिया। इसका उद्देश्य समूह की अलग-अलग कंपनियों के बीच बेहतर तालमेल, सरलता और बड़े स्तर पर अवसरों का फायदा उठाना था। TCS के अनुसार उनकी रणनीति में simplification, scale और synergy जैसे प्रमुख विचार शामिल रहे हैं।
यह सोच इसलिए महत्वपूर्ण थी क्योंकि Tata Group सिर्फ एक कंपनी नहीं बल्कि अलग-अलग इंडस्ट्री में काम करने वाली कई कंपनियों का बड़ा नेटवर्क है। ऐसे में समूह की ताकत को एक साथ इस्तेमाल करना और भविष्य के नए क्षेत्रों में जगह बनाना नेतृत्व के लिए महत्वपूर्ण जिम्मेदारी बन जाती है।
Tata Group में नए क्षेत्रों पर बढ़ा फोकस
Chandrasekaran के नेतृत्व में Tata Group ने कई नए और तेजी से विकसित होते क्षेत्रों पर ध्यान बढ़ाया। इनमें सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग, बैटरी निर्माण, डिजिटल प्लेटफॉर्म और मोबाइल टेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्र शामिल हैं। Tata के आधिकारिक प्रोफाइल के अनुसार, समूह ने अपनी एविएशन मौजूदगी भी बढ़ाई और Air India के अधिग्रहण के बाद इस क्षेत्र में अपनी स्थिति मजबूत करने की दिशा में काम किया।
यह बदलाव दिखाता है कि उनकी भूमिका सिर्फ मौजूदा कारोबार को संभालने तक सीमित नहीं रही। उनका फोकस ऐसे क्षेत्रों पर भी रहा जहां आने वाले वर्षों में बड़े कारोबारी अवसर बन सकते हैं।
Air India से लेकर नई टेक्नोलॉजी तक बड़ा बदलाव
Tata Group के लिए एविएशन सेक्टर हमेशा से महत्वपूर्ण रहा है, लेकिन Air India के अधिग्रहण ने इस क्षेत्र में समूह की मौजूदगी को एक नया आकार दिया। Chandrasekaran के नेतृत्व में Tata Group ने एयरलाइन कारोबार को एक बड़े वैश्विक प्लेटफॉर्म के रूप में विकसित करने की दिशा में कदम बढ़ाए।
दूसरी ओर, सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे क्षेत्रों में कदम रखने का फैसला भी आने वाले समय की तकनीकी जरूरतों को ध्यान में रखकर देखा जाता है। इससे यह संकेत मिलता है कि समूह की रणनीति केवल पारंपरिक कारोबार तक सीमित नहीं है।
N. Chandrasekaran को मिले बड़े सम्मान
लंबे कॉर्पोरेट करियर के दौरान N. Chandrasekaran को कई महत्वपूर्ण सम्मान भी मिले हैं। उन्हें वर्ष 2022 में भारत के प्रमुख नागरिक सम्मानों में शामिल Padma Bhushan से सम्मानित किया गया। इसके अलावा 2023 में उन्हें France का Légion d’Honneur सम्मान मिला। 2025 में उन्हें Honorary Knight of the Most Excellent Order of the British Empire से भी सम्मानित किया गया।
ये सम्मान उनके कॉर्पोरेट नेतृत्व और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उनके योगदान की पहचान के रूप में देखे जाते हैं।
N. Chandrasekaran की जिंदगी का एक अलग पहलू भी है
बिजनेस की दुनिया में बड़ी जिम्मेदारियों के बावजूद Chandrasekaran की दिलचस्पियां सिर्फ कॉर्पोरेट काम तक सीमित नहीं हैं। उन्हें फोटोग्राफी पसंद है और वह लंबे समय से मैराथन रनिंग से भी जुड़े रहे हैं। TCS के अनुसार वह World Marathon Majors के Six Star Finisher भी हैं।
यह पहलू उनकी कहानी को थोड़ा और मानवीय बनाता है। एक तरफ वह दुनिया के बड़े कारोबारी समूहों में से एक का नेतृत्व करते हैं और दूसरी तरफ अपने निजी जुनून के लिए भी समय निकालते हैं।
N. Chandrasekaran की किताब भी है खास
N. Chandrasekaran ने Roopa Purushothaman के साथ मिलकर “Bridgital Nation” नाम की किताब भी लिखी है। इसमें टेक्नोलॉजी और इंसानों के बीच संबंध तथा भारत की सामाजिक और आर्थिक चुनौतियों को तकनीक के माध्यम से हल करने की संभावनाओं पर विचार किया गया है।
उनकी यह सोच बताती है कि उनके लिए टेक्नोलॉजी का मतलब केवल मशीनों और सॉफ्टवेयर तक सीमित नहीं है। वह इसे लोगों की जिंदगी और अवसरों को बेहतर बनाने के एक माध्यम के रूप में भी देखते हैं।
करीब 40 साल का सफर आखिर इतना खास क्यों है?
आज के समय में लोग बेहतर अवसर के लिए बार-बार नौकरी बदलते हैं। ऐसे दौर में Chandrasekaran का 1987 से Tata ecosystem के साथ जुड़ा रहना निश्चित रूप से अलग कहानी बताता है। हालांकि यह कहना अधिक सटीक होगा कि उनका लगभग चार दशक का सफर Tata Group से जुड़ा रहा, जबकि TCS में उनका आधिकारिक कार्यकाल करीब 30 साल का रहा।
इस लंबे सफर में उन्होंने एक ही भूमिका में टिके रहने के बजाय खुद को लगातार बदला। शुरुआत टेक्नोलॉजी से हुई, फिर ग्लोबल बिजनेस और ऑपरेशंस की जिम्मेदारियां आईं, इसके बाद TCS का नेतृत्व और आखिर में पूरे Tata Group की कमान उनके हाथों में आई।
N. Chandrasekaran की कहानी से युवाओं को क्या सीख मिलती है?
उनकी कहानी का सबसे बड़ा संदेश शायद यही है कि करियर में हर चीज तुरंत हासिल नहीं होती। कभी-कभी एक मजबूत पहचान बनाने में कई साल लगते हैं। लेकिन अगर इंसान लगातार सीखता रहे और अपनी जिम्मेदारियों के साथ खुद को बेहतर बनाता रहे, तो वही लंबा सफर उसकी सबसे बड़ी ताकत बन सकता है।
Chandrasekaran की यात्रा यह भी दिखाती है कि टेक्नोलॉजी जैसी तेजी से बदलने वाली इंडस्ट्री में केवल पुराना अनुभव पर्याप्त नहीं होता। नई चीजों को समझने और बदलते समय के साथ खुद को अपडेट रखने की आदत भी जरूरी होती है।
N. Chandrasekaran के करियर की प्रमुख उपलब्धियां
| वर्ष/दौर | करियर का महत्वपूर्ण पड़ाव |
|---|---|
| 1987 | TCS से करियर की शुरुआत |
| 2002 | TCS में ग्लोबल सेल्स की जिम्मेदारी संभाली |
| 2009 | TCS के CEO और MD बने |
| 2012-13 | NASSCOM के चेयरमैन रहे |
| 2016 | Tata Sons के बोर्ड में शामिल हुए |
| 2017 | Tata Sons के चेयरमैन बने |
| 2022 | Padma Bhushan से सम्मानित हुए |
| 2023 | France के Légion d’Honneur से सम्मानित हुए |
| 2025 | Honorary Knight of the Most Excellent Order of the British Empire से सम्मानित हुए |
इन पड़ावों से साफ दिखाई देता है कि उनका करियर धीरे-धीरे बढ़ती जिम्मेदारियों और लंबे अनुभव पर आधारित रहा है।
आज N. Chandrasekaran की भूमिका क्या है?
वर्तमान में N. Chandrasekaran Tata Sons के चेयरमैन हैं। वह Tata Group की कई प्रमुख कंपनियों के बोर्ड की अध्यक्षता भी करते हैं, जिनमें Tata Steel, Tata Motors, Tata Power, Air India, Tata Consumer Products और Indian Hotels Company जैसी कंपनियां शामिल हैं।
उनकी जिम्मेदारी ऐसे समय में और महत्वपूर्ण हो जाती है जब बिजनेस की दुनिया AI, सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, डिजिटल प्लेटफॉर्म और नई मैन्युफैक्चरिंग तकनीकों जैसे क्षेत्रों में तेजी से बदल रही है।
निष्कर्ष
N. Chandrasekaran की कहानी को सिर्फ एक सफल CEO या बड़े कारोबारी समूह के चेयरमैन की कहानी कहना शायद पर्याप्त नहीं होगा। यह एक ऐसे प्रोफेशनल की यात्रा है जिसने 1987 में TCS से शुरुआत की, करीब तीन दशक तक उसी कंपनी में अलग-अलग जिम्मेदारियां निभाईं और फिर Tata Sons की कमान तक पहुंचे।
उनकी करीब चार दशक की Tata journey यह याद दिलाती है कि करियर में लंबा सफर कभी बेकार नहीं जाता। हर नई जिम्मेदारी, हर मुश्किल और हर बदलाव इंसान को कुछ नया सिखाता है। Chandrasekaran की सफलता की सबसे बड़ी खूबी यही दिखाई देती है कि उन्होंने समय के साथ खुद को बदलने से कभी परहेज नहीं किया।
एक साधारण शुरुआत से लेकर भारत के सबसे बड़े कारोबारी समूहों में से एक की अगुवाई तक पहुंचने की यह कहानी उन लोगों के लिए खास तौर पर प्रेरणादायक है जो अपने करियर में जल्दबाजी के बजाय लगातार सीखने और मजबूत नींव बनाने पर भरोसा रखते हैं। कभी-कभी सबसे लंबा रास्ता ही सबसे मजबूत पहचान बनाता है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
1. N. Chandrasekaran ने TCS कब जॉइन किया था?
N. Chandrasekaran ने 1987 में Tata Consultancy Services यानी TCS जॉइन किया था।
2. N. Chandrasekaran TCS के CEO कब बने?
वह 6 अक्टूबर 2009 को TCS के CEO और Managing Director बने थे।
3. N. Chandrasekaran Tata Sons के चेयरमैन कब बने?
उन्हें जनवरी 2017 में Tata Sons का चेयरमैन नियुक्त किया गया और उन्होंने 21 फरवरी 2017 से यह जिम्मेदारी संभाली।
4. N. Chandrasekaran ने TCS में कितने साल काम किया?
TCS के आधिकारिक प्रोफाइल के अनुसार उन्होंने TCS में करीब 30 साल काम किया, जिसमें आठ साल CEO और MD के रूप में शामिल थे।
5. N. Chandrasekaran को Padma Bhushan कब मिला?
उन्हें वर्ष 2022 में Padma Bhushan से सम्मानित किया गया था।
6. N. Chandrasekaran की किताब का नाम क्या है?
उन्होंने Roopa Purushothaman के साथ “Bridgital Nation” नाम की किताब लिखी है, जिसमें तकनीक और लोगों के बीच बेहतर जुड़ाव पर विचार किया गया है।
Disclaimer
यह लेख N. Chandrasekaran के करियर और सार्वजनिक रूप से उपलब्ध आधिकारिक जानकारी के आधार पर तैयार किया गया है। लेख का उद्देश्य पाठकों को उनके प्रोफेशनल सफर, नेतृत्व और उपलब्धियों के बारे में सरल एवं जानकारीपूर्ण तरीके से बताना है। इसमें दी गई जानकारी को किसी निवेश, शेयर खरीदने या वित्तीय निर्णय की सलाह के रूप में नहीं लिया जाना चाहिए। किसी भी कारोबारी या निवेश संबंधी निर्णय से पहले संबंधित कंपनी और आधिकारिक स्रोतों से जानकारी की पुष्टि जरूर करें।
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