Jharkhand परीक्षा प्रदर्शन: छात्रों से नई बातचीत से पहले मंत्रिमंडल की बैठक, JSSC-CGL पर सरकार का बड़ा फैसला
झारखंड में सरकारी भर्ती परीक्षाओं को लेकर चल रहा छात्र आंदोलन अब एक बेहद अहम मोड़ पर पहुंच गया है। लंबे समय से परीक्षा प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों और पारदर्शिता को लेकर आवाज उठा रहे अभ्यर्थियों के बीच सरकार के एक बड़े फैसले ने हलचल बढ़ा दी है। छात्रों और सरकार के बीच बातचीत का एक और दौर शुरू होने से पहले 17 अगस्त को राज्य मंत्रिमंडल की बैठक हुई, जिसमें भर्ती परीक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण फैसले सामने आए।
JSSC-CGL को लेकर छात्रों की नाराजगी काफी समय से बनी हुई थी। अभ्यर्थियों का कहना है कि सरकारी नौकरी की तैयारी में वे महीनों और कई बार वर्षों की मेहनत लगाते हैं। ऐसे में परीक्षा प्रक्रिया को लेकर उठने वाले सवाल उनके भविष्य और मेहनत दोनों से जुड़े होते हैं। इसी वजह से छात्र परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और निष्पक्ष जांच की मांग पर लगातार जोर देते रहे हैं।
मंत्रिमंडल की बैठक के बाद सरकार की ओर से JSSC-CGL परीक्षा को रद्द करने का फैसला सामने आया। इसके साथ ही पुरानी भर्ती परीक्षाओं से जुड़ी कथित अनियमितताओं की समीक्षा के लिए जांच समिति बनाने की बात भी कही गई है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि सरकार और छात्रों के बीच अगली बातचीत किस दिशा में आगे बढ़ती है।
झारखंड परीक्षा विवाद की पूरी जानकारी एक नजर में
झारखंड में चल रहे छात्र आंदोलन और सरकार के फैसले को समझने के लिए कुछ महत्वपूर्ण जानकारियां इस तरह देखी जा सकती हैं।
| जानकारी | विवरण |
|---|---|
| आंदोलन का मुख्य मुद्दा | भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताएं |
| प्रमुख परीक्षाएं | JPSC, JSSC-CGL और अन्य भर्ती परीक्षाएं |
| आंदोलन का प्रमुख केंद्र | रांची |
| आंदोलन तेज होने की तारीख | 29 जुलाई 2026 |
| महत्वपूर्ण प्रदर्शन | 10 अगस्त 2026 |
| मंत्रिमंडल की बैठक | 17 अगस्त 2026 |
| JSSC-CGL पर फैसला | परीक्षा रद्द करने की घोषणा |
| जांच समिति | गठित करने की घोषणा |
| समिति की अध्यक्षता | IAS अधिकारी अमिताभ कौशल |
| छात्रों की प्रमुख मांग | निष्पक्ष जांच और पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया |
| अन्य प्रमुख मांग | CBI जांच की मांग |
Jharkhand छात्र आंदोलन का मामला क्या है?
झारखंड में सरकारी भर्ती परीक्षाओं को लेकर छात्रों की नाराजगी कोई अचानक पैदा हुई स्थिति नहीं है। JPSC और JSSC की अलग-अलग परीक्षाओं से जुड़े मामलों को लेकर अभ्यर्थी लंबे समय से सवाल उठाते रहे हैं। छात्रों का कहना है कि भर्ती प्रक्रिया में किसी भी तरह की अनियमितता का सीधा असर उन युवाओं पर पड़ता है जो नौकरी हासिल करने के लिए लंबे समय से तैयारी कर रहे हैं।
रांची में 29 जुलाई से आंदोलन ने ज्यादा जोर पकड़ा और बड़ी संख्या में अभ्यर्थी प्रदर्शन में शामिल हुए। छात्रों की मांग केवल किसी एक परीक्षा के परिणाम तक सीमित नहीं रही, बल्कि वे भर्ती प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाने और कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच की मांग करते रहे हैं।
उनका कहना है कि सरकारी नौकरी की परीक्षा में मेहनत करने वाले हर उम्मीदवार को बराबर अवसर मिलना चाहिए। अगर किसी परीक्षा की प्रक्रिया पर सवाल खड़े होते हैं तो उनकी निष्पक्ष जांच जरूरी है, ताकि अभ्यर्थियों का भरोसा बना रहे।
छात्रों की प्रमुख मांगें क्या हैं?

आंदोलन के दौरान छात्रों की कई मांगें सामने आई हैं। इनका मुख्य केंद्र भर्ती परीक्षाओं की निष्पक्षता और पारदर्शिता रहा है।
| छात्रों की मांग | क्या चाहते हैं छात्र? |
|---|---|
| निष्पक्ष जांच | भर्ती परीक्षाओं में सामने आई कथित अनियमितताओं की जांच |
| पारदर्शी परीक्षा प्रक्रिया | भविष्य की परीक्षाओं में स्पष्ट और सुरक्षित व्यवस्था |
| विवादित परीक्षाओं पर कार्रवाई | जिन परीक्षाओं पर सवाल उठे हैं, उन पर उचित निर्णय |
| CBI जांच | कई प्रदर्शनकारियों ने केंद्रीय जांच की मांग की |
| भर्ती प्रक्रिया में सुधार | परीक्षा व्यवस्था में ऐसी कमियां दोबारा न हों |
| छात्रों का भरोसा | अभ्यर्थियों को निष्पक्ष भर्ती प्रक्रिया का भरोसा मिले |
मंत्रिमंडल की बैठक क्यों रही खास?
17 अगस्त को हुई मंत्रिमंडल की बैठक इसलिए महत्वपूर्ण रही क्योंकि यह बैठक ऐसे समय में हुई जब सरकार और आंदोलनकारी छात्रों के बीच बातचीत को आगे बढ़ाने की कोशिश चल रही थी। छात्रों की नाराजगी को देखते हुए सरकार के सामने परीक्षा विवाद का समाधान निकालने की चुनौती थी।
बैठक के बाद JSSC-CGL परीक्षा को रद्द करने की घोषणा सामने आई। सरकार की ओर से परीक्षा से जुड़ी कथित अनियमितताओं को ध्यान में रखते हुए यह फैसला लिया गया। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की ओर से यह भी कहा गया कि निर्धारित SOP का सही तरीके से पालन किया जाता तो ऐसी स्थिति पैदा नहीं होती।
इसके साथ ही सरकार ने 2014 से अब तक भर्ती परीक्षाओं में हुई कथित छोटी-बड़ी गड़बड़ियों की समीक्षा के लिए समिति गठित करने की घोषणा की। इस समिति की अध्यक्षता IAS अधिकारी अमिताभ कौशल को दी गई है।
JSSC-CGL परीक्षा रद्द होने से छात्रों में खुशी
JSSC-CGL परीक्षा रद्द किए जाने की खबर सामने आने के बाद प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों के बीच खुशी देखने को मिली। लंबे समय से परीक्षा प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाने वाले छात्रों के लिए यह फैसला एक महत्वपूर्ण कदम माना गया।
हालांकि, परीक्षा रद्द होना आंदोलन की सभी मांगों का अंत नहीं है। छात्रों की ओर से निष्पक्ष जांच और अन्य भर्ती परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों पर भी सवाल उठाए जाते रहे हैं। ऐसे में आगे की बातचीत और सरकार की कार्रवाई इस पूरे मामले की दिशा तय करेगी।
JSSC-CGL पर सरकार के फैसले का असर
| फैसला | संभावित असर |
|---|---|
| JSSC-CGL परीक्षा रद्द | अभ्यर्थियों को नई परीक्षा प्रक्रिया का इंतजार करना होगा |
| जांच समिति का गठन | पुरानी भर्ती परीक्षाओं की कथित गड़बड़ियों की समीक्षा होगी |
| छात्रों से बातचीत | आंदोलन को शांतिपूर्ण तरीके से समाप्त करने की संभावना |
| परीक्षा व्यवस्था की समीक्षा | भविष्य की भर्ती प्रक्रिया में सुधार की उम्मीद |
| सरकार की कार्रवाई | छात्रों के बीच भरोसा बढ़ाने की कोशिश |
सरकार और छात्रों के बीच पहले भी हुई बातचीत

सरकार और प्रदर्शनकारी छात्रों के बीच बातचीत का यह पहला प्रयास नहीं है। इससे पहले भी कई दौर की चर्चा हो चुकी है, लेकिन सभी मुद्दों पर सहमति नहीं बन सकी थी। 9 अगस्त को हुई बातचीत भी किसी निर्णायक समाधान तक नहीं पहुंच पाई थी।
इसके बाद सरकार की ओर से छात्रों को एक और बातचीत के लिए बुलाने की कोशिश की गई। इस बातचीत में कानूनी पहलुओं पर भी चर्चा की संभावना रही, ताकि परीक्षा विवाद से जुड़े मुद्दों को ज्यादा स्पष्ट तरीके से समझा जा सके।
अब JSSC-CGL परीक्षा रद्द किए जाने के बाद अगली बातचीत और भी महत्वपूर्ण हो गई है। छात्र यह जानना चाहेंगे कि बाकी मांगों और कथित अनियमितताओं की जांच को लेकर सरकार आगे क्या कदम उठाती है।
छात्रों की सबसे बड़ी चिंता क्या है?
छात्रों की नाराजगी के पीछे सबसे बड़ी चिंता परीक्षा व्यवस्था पर भरोसे की है। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले युवा अपना काफी समय पढ़ाई में लगाते हैं। कई अभ्यर्थियों के लिए सरकारी नौकरी उनके करियर के साथ-साथ परिवार की आर्थिक उम्मीदों से भी जुड़ी होती है।
ऐसे में अगर किसी परीक्षा में कथित गड़बड़ी की बात सामने आती है तो अभ्यर्थियों के बीच स्वाभाविक रूप से चिंता बढ़ जाती है। यही वजह है कि छात्र केवल परीक्षा परिणाम नहीं बल्कि पूरी भर्ती प्रक्रिया की निष्पक्षता पर जोर दे रहे हैं।
10 अगस्त के प्रदर्शन के बाद बढ़ा था तनाव
अगस्त के दौरान आंदोलन ने उस समय ज्यादा गंभीर रूप लिया जब 10 अगस्त को बड़ी संख्या में युवा विधानसभा की ओर मार्च करने पहुंचे। इस दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच तनाव की स्थिति बनी।
स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस की ओर से आंसू गैस, पानी की बौछार और लाठी के इस्तेमाल की रिपोर्ट सामने आई। इस घटना के बाद सरकार और प्रदर्शनकारी छात्रों के बीच बातचीत के जरिए समाधान निकालने की जरूरत और ज्यादा महत्वपूर्ण हो गई।
ऐसे माहौल में बातचीत का रास्ता खुला रखना दोनों पक्षों के लिए जरूरी माना जा रहा है, क्योंकि परीक्षा विवाद का स्थायी समाधान केवल स्पष्ट निर्णय और भरोसे के माहौल से ही संभव हो सकता है।
JPSC और JSSC विवाद ने क्यों पकड़ा तूल?
JPSC और JSSC से जुड़ी परीक्षाओं को लेकर छात्रों की नाराजगी केवल एक परीक्षा तक सीमित नहीं रही है। अलग-अलग भर्ती प्रक्रियाओं में कथित पेपर लीक, OMR से जुड़ी समस्याओं और परीक्षा प्रक्रिया में देरी जैसे आरोपों ने अभ्यर्थियों की चिंता बढ़ाई है।
हालांकि किसी भी आरोप को अंतिम सत्य मानने से पहले संबंधित जांच और आधिकारिक रिपोर्ट का इंतजार करना जरूरी है। जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि किसी मामले में वास्तव में क्या हुआ और जिम्मेदारी किस स्तर पर तय होती है।
भर्ती परीक्षा विवाद से जुड़े प्रमुख मुद्दे
| मुद्दा | छात्रों की चिंता |
|---|---|
| कथित पेपर लीक | परीक्षा की गोपनीयता और निष्पक्षता |
| OMR से जुड़े सवाल | उत्तर प्रक्रिया की विश्वसनीयता |
| परीक्षा में देरी | अभ्यर्थियों का समय और तैयारी प्रभावित होना |
| परिणाम से जुड़े विवाद | चयन प्रक्रिया पर सवाल |
| जांच की मांग | निष्पक्ष तरीके से सच्चाई सामने आना |
| भर्ती प्रक्रिया | भविष्य में बेहतर व्यवस्था की जरूरत |
जांच समिति करेगी पुरानी गड़बड़ियों की समीक्षा
सरकार ने 2014 से अब तक भर्ती परीक्षाओं में हुई कथित छोटी-बड़ी अनियमितताओं की व्यापक समीक्षा के लिए जांच समिति बनाने की घोषणा की है। इस समिति की अध्यक्षता IAS अधिकारी अमिताभ कौशल करेंगे।
इस जांच का महत्व इसलिए भी ज्यादा है क्योंकि इससे अलग-अलग समय में सामने आए परीक्षा संबंधी विवादों को एक व्यापक नजरिए से देखने का मौका मिलेगा। अगर जांच के दौरान किसी प्रक्रिया में कमी सामने आती है तो भविष्य में उसे सुधारने के लिए कदम उठाए जा सकते हैं।
छात्रों के लिए केवल समिति बनना ही पर्याप्त नहीं होगा। वे यह भी देखेंगे कि जांच कितनी पारदर्शी तरीके से होती है और उसके निष्कर्षों के आधार पर आगे क्या कार्रवाई की जाती है।
2014 से अब तक की भर्ती परीक्षाओं की जांच क्यों महत्वपूर्ण?
पुराने मामलों की समीक्षा से यह पता लगाने में मदद मिल सकती है कि भर्ती परीक्षा प्रणाली में बार-बार किस तरह की समस्याएं सामने आती रही हैं। इससे केवल मौजूदा विवाद को समझने में ही मदद नहीं मिलेगी, बल्कि भविष्य की परीक्षाओं को ज्यादा सुरक्षित बनाने की दिशा भी मिल सकती है।
| जांच का उद्देश्य | संभावित फायदा |
|---|---|
| पुराने मामलों की समीक्षा | समस्याओं की पहचान |
| परीक्षा प्रक्रिया का अध्ययन | कमजोर व्यवस्था सामने आना |
| SOP की जांच | नियमों के पालन की स्थिति स्पष्ट होना |
| जिम्मेदारी तय करना | संबंधित स्तर पर कार्रवाई की संभावना |
| सुधार की सिफारिश | भविष्य की परीक्षाएं बेहतर बनाना |
आंदोलन का अगला रास्ता क्या होगा?
JSSC-CGL परीक्षा रद्द होने के बाद आंदोलन की दिशा में बदलाव आने की संभावना है, लेकिन अभी पूरा विवाद खत्म नहीं हुआ है। छात्रों की बाकी मांगें और जांच प्रक्रिया आगे किस तरह बढ़ती है, यह काफी महत्वपूर्ण रहेगा।
प्रदर्शनकारी अब सरकार से यह उम्मीद कर सकते हैं कि बाकी मुद्दों पर भी स्पष्ट जानकारी दी जाए। दूसरी ओर सरकार के सामने चुनौती यह होगी कि बातचीत को सकारात्मक बनाए रखते हुए छात्रों की चिंताओं का समाधान निकाला जाए।
अगर दोनों पक्ष बातचीत के जरिए किसी व्यापक समाधान तक पहुंचते हैं तो लंबे समय से चल रहे आंदोलन को शांतिपूर्ण तरीके से समाप्त करने का रास्ता खुल सकता है।
युवाओं के लिए यह मुद्दा क्यों महत्वपूर्ण है?
सरकारी नौकरी की तैयारी करने वाले युवाओं के लिए परीक्षा सिर्फ एक प्रश्नपत्र और परिणाम का नाम नहीं है। इसके पीछे लंबे समय की पढ़ाई, मेहनत, पैसे और परिवार की उम्मीदें जुड़ी होती हैं।
इसीलिए किसी भी भर्ती परीक्षा में पारदर्शिता और निष्पक्षता बेहद जरूरी है। अभ्यर्थियों को यह भरोसा होना चाहिए कि परीक्षा में सभी उम्मीदवारों को समान अवसर मिलेगा और किसी भी शिकायत की स्थिति में निष्पक्ष तरीके से जांच की जाएगी।
झारखंड का मौजूदा विवाद इसी बड़े सवाल को सामने लाता है कि सरकारी भर्ती परीक्षाओं को कैसे ज्यादा सुरक्षित, पारदर्शी और भरोसेमंद बनाया जाए।
झारखंड परीक्षा विवाद: सरकार बनाम छात्रों की स्थिति
| विषय | सरकार का पक्ष | छात्रों की चिंता |
|---|---|---|
| JSSC-CGL | परीक्षा रद्द करने का फैसला | आगे की परीक्षा प्रक्रिया |
| कथित अनियमितताएं | जांच समिति की घोषणा | निष्पक्ष जांच की मांग |
| भर्ती प्रक्रिया | SOP और व्यवस्था में सुधार की जरूरत | पारदर्शिता की मांग |
| बातचीत | छात्रों से संवाद की कोशिश | मांगों पर स्पष्ट फैसला |
| पुरानी परीक्षाएं | 2014 से समीक्षा की घोषणा | कार्रवाई और रिपोर्ट का इंतजार |
| जांच | समिति के जरिए समीक्षा | कई छात्र CBI जांच चाहते हैं |
इस पूरे विवाद से क्या बदल सकता है?
झारखंड में चल रहे विवाद के बाद भर्ती परीक्षा व्यवस्था में कुछ महत्वपूर्ण सुधारों की जरूरत पर चर्चा तेज हो सकती है। परीक्षा केंद्रों की सुरक्षा, प्रश्नपत्र की गोपनीयता, OMR प्रक्रिया, निगरानी और शिकायत निवारण जैसे क्षेत्रों को और मजबूत किया जा सकता है।
सबसे जरूरी बात यह होगी कि भविष्य में परीक्षा को लेकर कोई सवाल उठने पर अभ्यर्थियों को समय पर स्पष्ट जानकारी मिले। इससे अफवाहों और अविश्वास की स्थिति को कम करने में मदद मिल सकती है।
Jharkhand छात्र आंदोलन के फायदे और चुनौतियां
| सकारात्मक पहलू | चुनौती |
|---|---|
| परीक्षा प्रक्रिया पर चर्चा तेज हुई | छात्रों और सरकार के बीच भरोसे की कमी |
| JSSC-CGL पर सरकार ने फैसला लिया | बाकी मांगों पर समाधान बाकी |
| जांच समिति बनाने की घोषणा | जांच के निष्कर्ष का इंतजार |
| भर्ती व्यवस्था में सुधार की संभावना | भविष्य की परीक्षाओं को लेकर चिंता |
| सरकार और छात्रों के बीच बातचीत जारी | सभी पक्षों के बीच सहमति बनाना कठिन |
क्या JSSC-CGL का फैसला छात्रों के लिए बड़ी राहत है?
JSSC-CGL परीक्षा रद्द करने का फैसला निश्चित रूप से आंदोलन कर रहे अभ्यर्थियों के लिए एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम है। लंबे समय से परीक्षा प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाने वाले छात्रों को अब सरकार के अगले कदम का इंतजार रहेगा।
हालांकि, इसे पूरे विवाद का अंतिम समाधान कहना जल्दबाजी होगी। छात्रों की अन्य मांगों और पुरानी भर्ती परीक्षाओं से जुड़े मामलों की जांच का परिणाम भी उतना ही महत्वपूर्ण होगा। आने वाले दिनों में सरकार और छात्रों के बीच होने वाली बातचीत से स्थिति और स्पष्ट हो सकती है।
निष्कर्ष
झारखंड में भर्ती परीक्षाओं को लेकर चल रहा छात्र आंदोलन अब ऐसे पड़ाव पर है जहां सरकार की कार्रवाई और छात्रों की अगली रणनीति दोनों महत्वपूर्ण होंगी। 17 अगस्त की मंत्रिमंडल बैठक के बाद JSSC-CGL परीक्षा रद्द करने और पुरानी भर्ती परीक्षाओं की कथित अनियमितताओं की समीक्षा के लिए समिति गठित करने का फैसला सामने आया है।
इस फैसले से छात्रों की कुछ प्रमुख चिंताओं पर सरकार की ओर से कार्रवाई जरूर दिखाई देती है, लेकिन आंदोलन से जुड़े सभी सवालों का जवाब अभी बाकी है। अब सबसे ज्यादा नजर इस बात पर होगी कि जांच किस तरह आगे बढ़ती है और सरकार बाकी मांगों को लेकर क्या निर्णय लेती है।
छात्रों के लिए सबसे जरूरी चीज भरोसा है। अगर जांच पारदर्शी तरीके से होती है और भविष्य की भर्ती परीक्षाओं को ज्यादा सुरक्षित एवं निष्पक्ष बनाया जाता है, तो इस विवाद से एक सकारात्मक बदलाव की शुरुआत हो सकती है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
1. Jharkhand में छात्र प्रदर्शन क्यों कर रहे हैं?
झारखंड में छात्र JPSC, JSSC-CGL और अन्य भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं, पारदर्शिता और निष्पक्ष जांच को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं।
2. क्या JSSC-CGL परीक्षा रद्द कर दी गई है?
हां। 17 अगस्त 2026 को झारखंड सरकार की ओर से JSSC-CGL परीक्षा रद्द करने की घोषणा की गई।
3. क्या सरकार ने जांच समिति बनाई है?
सरकार ने 2014 से अब तक भर्ती परीक्षाओं में हुई कथित अनियमितताओं की समीक्षा के लिए समिति गठित करने की घोषणा की है। इसकी अध्यक्षता IAS अधिकारी अमिताभ कौशल करेंगे।
4. क्या छात्रों की सभी मांगें मान ली गई हैं?
JSSC-CGL को रद्द करने की दिशा में बड़ा फैसला लिया गया है, लेकिन छात्रों की अन्य मांगों और जांच से जुड़े मुद्दों पर आगे की बातचीत और सरकारी कार्रवाई महत्वपूर्ण रहेगी।
5. झारखंड छात्र आंदोलन कब तेज हुआ?
रांची में मौजूदा आंदोलन 29 जुलाई 2026 से तेज हुआ और बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों ने प्रदर्शन में हिस्सा लिया।
6. छात्रों की प्रमुख मांग क्या है?
छात्र भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच, विवादित परीक्षाओं पर उचित कार्रवाई और भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग कर रहे हैं। कुछ प्रदर्शनकारियों ने CBI जांच की मांग भी उठाई है।
7. 10 अगस्त को क्या हुआ था?
10 अगस्त को प्रदर्शनकारी छात्र विधानसभा की ओर मार्च करने पहुंचे थे। इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तनाव की स्थिति बनी थी।
8. जांच समिति का क्या काम होगा?
समिति का उद्देश्य 2014 से अब तक भर्ती परीक्षाओं से जुड़ी कथित अनियमितताओं की समीक्षा करना और परीक्षा व्यवस्था में सामने आई समस्याओं को समझना है।
डिस्क्लेमर
यह लेख उपलब्ध जानकारी और सामने आई मीडिया रिपोर्टों के आधार पर तैयार किया गया है। परीक्षा विवाद से जुड़े आरोपों को अंतिम सत्य नहीं माना जाना चाहिए, जब तक संबंधित सक्षम प्राधिकरण की जांच या आधिकारिक रिपोर्ट सामने न आ जाए। सरकार के फैसले, छात्रों की मांगें और आंदोलन की स्थिति समय के साथ बदल सकती है। पाठकों को नवीनतम जानकारी के लिए संबंधित सरकारी विभाग और आधिकारिक स्रोतों की जानकारी भी देखनी चाहिए।
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